"जीवन के सफर में हम सब एक 'सौदागर' की तरह हैं। हम रोज़ सपनों का सौदा करते हैं, अपने संकल्पों की पूरी पूंजी दांव पर लगाते हैं और दिन-रात इस उम्मीद में भागते हैं कि एक दिन हम उस 'मंजिल' तक पहुँच जाएंगे।" हैरानी की बात तो यह है कि उस मंजिल को पाने के लिए हम क्या कुछ नहीं करते? न जाने कितना दिमाग लड़ाते हैं, कितनी कलाकारियाँ दिखाते हैं, कभी चालबाजी तो कभी उचित-अनुचित का विचार भी पीछे छोड़ देते हैं। लेकिन क्या कभी आपने रुककर ठंडे दिमाग से सोचा है कि जिस मंजिल के लिए आप इतना संघर्ष कर रहे हैं, क्या वहाँ पहुँचकर सच में वह शांति मिलेगी जिसकी आपको तलाश है? "आर्थिक समृद्धि के साथ-साथ मन की शांति भी अनिवार्य है। मेरा नया लेख: परमात्मा अब तू ही ले चल " में मैंने इसी 'अंतराल' की बात की थी—वह खालीपन जो तब महसूस होता है जब सपने पूरे होकर भी अधूरे रह जाते हैं। 🌟 ट्रेंडिंग (Google Discover): हसल कल्चर (Hustle Culture) और आध्यात्मिक शांति आजकल Google News और Discover पर 'Spiritual Detachm...
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